मंगलवार, 25 जुलाई 2017

ज्योतिर्मयी पंत की रचनाएं


चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार


वर्षा रानी (गीतिका)


जल बूँदें संजीवन बिखरे
तुम आती तो जीवन निखरे। 

बूँदें नाच भिगाती अंचल
रूप धरा का सिंचन निखरे। 

रोमांचित तब हरित दूब हो
फल फूलों में जीवन निख्ररे। 

तुम नाराज़ कभी मत होना
आस कृषक की जीवन ठहरे। 

तीज पर्व तुम बिन नहिं सोहे
कमी तुम्हारी निशदिन अखरे। 


आया सावन .....


लो फिर आया सावन
है सबका मनभावन। 

तपन घटी हिय हरसे
झूले पड़े झुलावन। 

रिमझिम बूँदें झरती
तीज पर्व की आवन। 

चूड़ी मेंहदी रचे
सखियाँ कजरी गावन। 

शिव पूजा अर्चन से
प्राप्त पुण्यअति पावन। 

 

कुछ हाइकु


(एक)

आया सावन
तीज मन भावन
सखी मिलन। 


(दो)

पूरी उम्मीदें
वर्षा रिमझिम बूँदें
आई खुशियाँ। 


(तीन)

बूँद बौछार
गायें गीत मल्हार
सावन प्यार। 


(चार)

वर्षा ले आई
सूखें में हरियाली
आस जगाई। 


(पांच)

वर्षा की बूँदें
क्षणिक बुलबुले दें
जीवन सीख। 


(छह)

भीगता तन
विरही तप्त मन
लाये सावन। 


(सात)

बूँदों की लड़ी
सजते पेड़ पौधे
रंगत बढ़ी। 

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